होलिकादहन के कृत्य, मुहूर्त व 5 अमोघ लघु प्रयोग

होलिकादहन के कृत्य, मुहूर्त व 5 अमोघ लघु प्रयोग

holi 2021 muhurta

विषय सूची

होली का महत्व-

होली का पर्व दो ऋतुओं के मध्य में मनाया जाता है इसका भारतीय परिपेक्ष्य में सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है, होली का पर्व सामाजिक एकता व सद्भावना का प्रतीक भी है |

होलिकादहन की रात्रि को महारात्रि की संज्ञा दी गई है इस महारात्रि के साधनात्मक मुहुर्त पर अनेकों कोटि कोटि साधकगण अपनी साधनाओं और क्रियाओं को सम्पन्न कर साधनात्मक लाभ लेते है, इस रात्रि में प्रकृति में सकारात्मक व नकारात्मक दोनों ऊर्जायें विशिष्ट रूप से प्रभावी होती है और अल्प प्रयास से ही साधनाओं में सफलता मिलने लगती है यह हमारे ऊपर निर्भर है की हम इन सबका किस प्रकार प्रयोग करते है, नीचे कुछ उपयोगी प्रयोग इस होली की रात्रि पर करके आप अपने जीवन में इसका लाभ ले सकते है ये सभी प्रयोग अनुभूत है और इन सभी का लाभ बहुत लोगों ने उठाया है, आशा है की आप सभी लाभान्वित होंगे |   

 

होलिकादहन मुहूर्त-

 

पूर्णिमा – 28 मार्च 2021 (03:27) से 29 मार्च 2021 (00:18) तक

होलिकादहन मुहूर्त – 28 मार्च 2021 को 6:40 सायंकाल से 9:04 रात्रि तक 

उपरोक्त समय 24 घंटे के अनुसार है व पञ्चांग के मानक स्थान उज्जैन ( म.प्र.) के अनुसार दिया गया है | 

 

होलिका के समक्ष किये जाने वाले मुख्य कृत्य-

 

होली पर किये जाने वाले धार्मिक प्रक्रियाओं का बहुत अधिक महत्व होता है क्योंकि इस काल में इन क्रियाओं का प्रभाव अति तीव्र होता है, होली पर मुख्यतः तीन प्रक्रियाओं को सभी को अवश्य रूप से करना चाहिए जिससे की सुख सौभाग्य की प्राप्ति हो –

 

  • अपने शरीर की लम्बाई अर्थात पैर के अंगूठे से सर तक के नाप के बराबर कच्चा सूत लेकर अपने सर से सात बार घुमा कर होलिका की अग्नी में डालें |

 

  • आटा व सरसों का तेल मिला कर उबटन बना ले इस उबटन को पुरे शरीर में लगायें फिर उबटन को छुड़ाकर एक गोले के रूप में बनाकर होलिका की अग्नी में समर्पित कर दें |

 

  • उपरोक्त दोनों प्रक्रियाओं को करने के पश्चात होलिका की 7 बार दक्षिणावर्त (घड़ी की सुई के चलने की दिशा के अनुसार) परिक्रमा करें |  

 

होली पर किये जाने वाले लघु प्रयोग-

 
  1. आर्थिक उन्नति के लिए-

   ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन पालिन्यै महालक्ष्म्यै अस्माकं दारिद्रयं नाशय प्रचुरं धनं देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ ||

होलिकादहन के पश्चात रात्रि में स्न्नान कर अपने समक्ष माता महालक्ष्मी की फोटो या मूर्ति को लाल वस्त्र पर स्थापित कर उनका पञ्चोपचार ( गंध,पुष्प,धूप,दीप व नैवेद्य से ) पूजन करें फिर स्फटिक या कमलगट्टे की माला से उपरोक्त मन्त्र की 21 माला मंत्र का जाप पश्चिम मुख हो कर करें जाप के पश्चात दशांश हवन करें, जपकर्ता का वस्त्र व आसन लाल रंग का होना चाहिए |

होली के पश्चात अगले 41 दिनों तक प्रतिदिन रात्रिकाल में 5 माला का जाप उपरोक्त विधि से करें ताकि मन्त्र चैतन्य हो सके, इसके बाद प्रतिदिन एक माला का जाप किसी भी समय करने से माता महालक्ष्मी की कृपा मिलती है और उत्तरोत्तर आर्थिक उन्नति होने लगाती है | पूर्णिमा या अमावस्या पर उपरोक्त मन्त्र से हवन करते रहने से यह मन्त्र विशिष्ट रूप से प्रभावी होता है | 

 

  1. रोगों के निर्मूलन के लिए-

     ॐ क्षीं क्षीं क्षीं क्षीं क्षीं फट्  ||

होली के पर्व पर रोगों की निवृति के लिये होलिकादहन के पश्चात रात्रि में स्न्नान कर उपरोक्त मन्त्र का उत्तर मुख होकर रुद्राक्ष की माला से 11 माला मंत्र जाप करें फिर केवल शुद्ध घी से 108 बार हवन करें |

होली के पश्चात अगले 41 दिनों तक प्रतिदिन 7 माला मंत्र का जाप करें और जाप के 41वें दिन यथाशक्ति शुद्ध घी से हवन कर दें | जपकर्ता को अगर कोई रोग हो तो प्रतिदिन 3 माला मन्त्र का जाप तब तक करें जब तक मनोवांछित परिणाम न मिले | यदि जपकर्ता के अलावा कोई अन्य व्यक्ति रोगग्रस्त हो तो थोड़े से पीले सरसों को 108 बार अभिमंत्रित कर के दक्षिण मुख होकर रोगी के सर से 7 बार दक्षिणावर्त (घड़ी की सुई के चलने की दिशा के अनुसार) घुमाकर घर या अपने कमरे की दक्षिण दिशा में अग्नी जलाकर उक्त सरसों को उसमे डाल दें | जब तक रोग की शांति न हो तब तक इस क्रिया को करते रहे |   

 

  1. तंत्र बाधा की समाप्ति के लिए –

     हूँ हूँ महाकाल प्रसीद प्रसीद ह्रीं ह्रीं स्वाहा ||

जब भी कोई व्यक्ति या कोई परिवार तंत्र बाधा से ग्रसित होता है तो उनका जीवन अत्यंत कष्टकारी व  नारकीय हो जाता है यदि आपको ऐसा लगता है की आप किसी प्रकार की तंत्र बाधा से ग्रसित हैं तब आपको कालों के काल भगवान महाकाल के शरण में आना चाहिए इस ब्रम्हांड की कोई ऐसी तंत्र बाधा नहीं जो प्रभु के सामने टिक सके |

होलिकादहन के पश्चात स्न्नान कर उत्तरमुख हो कर किसी शिव मंदिर में श्वेत वस्त्र धारण कर अपने व अपने परिवार पर जो भी तंत्र बाधा हो उसकी समाप्ति का संकल्प लेकर भगवान शिव का अभिषेक कर उनका पञ्चोपचार ( गंध,पुष्प,धूप,दीप व नैवेद्य से ) पूजन करें फिर रुद्राक्ष की माला से उपरोक्त मंत्र का 51 माला का जाप करें जाप के पश्चात 5 माला मंत्र से हवन कर दें |  

 

  1. नवग्रहों को अनुकूल करने के लिए-

     ॐ नमो भगवते भास्कराय अस्माकं सर्व ग्रहाणां पीड़ा नाशनं कुरु कुरु स्वाहा ||

होलिकादहन के पश्चात रात्रि में स्न्नान कर अपने समक्ष एक साबुत सुखा नारियल मेवा वाला लेकर उसमे ऊपर एक छेद करके उस नारियल आटा व चीनी का मिश्रण भर दें , अब पूर्व की और मुख करके उपरोक्त मन्त्र की 9 माला मंत्र जाप रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से जाप करें | जाप करके नवग्रह की समिधा से 108 बार हवन करें ये नवग्रह की समिधा पंसारी या पूजापाठ की सामग्री बेचने वालों के यहाँ मिल जाएगा | दूसरे दिन उपरोक्त नारियल को जहाँ पर चीटियाँ हो वहां  भूमि में दबा दे और ऊपर का भाग मिट्टी से न ढकें ताकि चीटियों को भोजन मिल सके |

होली के बाद से प्रतिदिन 108 बार इस मन्त्र का जाप करते रहने से नवग्रहों की शांति बनी रहती है |  

 

  1. शत्रुओं से सुरक्षा के लिए –

     आं ह्रीं क्ष्रौ क्रौं हुं फट् ||

होली के अवसर पर भगवान नृसिंह की विशेष कृपा रहती है यदि आपको कोई अनायास ही परेशान कर रहा हो तो आपको भगवान नृसिंह के शरण में आना चाहिए |

होलिकादहन के पश्चात रात्रि में स्न्नान कर पूर्व या उत्तर मुख होकर अपने समक्ष भगवान नृसिंह की फोटो या मूर्ति को  पीले वस्त्र पर स्थापित करें फिर भगवान नृसिंह का पञ्चोपचार ( गंध,पुष्प,धूप,दीप व नैवेद्य से ) पूजन करें, प्रभु के पूजन में तुलसी अवश्य चढायें, पूजन के पश्चात बिना किसी माला के उपरोक्त मंत्र का सवा घंटे जाप करें, जाप के पश्चात 108 बार हवन करें | जाप करते समय प्रभु से प्रार्थना करें की जो भी व्यक्ति आपके विरोध में है उसकी जो भी मनोभावना आपके विरोध में है वह विरोधी मानसिकता समाप्त हो और आपस में कोई मतभेद न रहे |

भगवान नृसिंह भगवान विष्णु का उच्च अवतार है इनकी शक्ति अत्यंत ही तीक्ष्ण है इनकी उपासना में प्रभु से यह निवेदन करें की आपके और आपके परिवार की सर्वत्र एवं सर्वविध सुरक्षा हो साथ में यह भी प्रार्थना करे आपको और आपके विरोधी दोनों को सदबुद्धि मिले और आपस में सद्भावना स्थापित हो, कभी भी इस प्रकार की उच्च शक्तियों से किसी के अहित की कामना नहीं करनी चाहिए अन्यथा शक्ति क्रुद्ध हो सकती है, हमें यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए की विरोध व्यक्ति की मानसिकता से है न की व्यक्ति से है अत: जो विरोधी मानसिकता है वह समाप्त हो |

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