सात मुखी रुद्राक्ष की महिमा व धारण विधि :

सात मुखी रुद्राक्ष की महिमा व धारण विधि :

सात मुखी रुद्राक्ष में प्राकृतिक रूप से इसकी सतह पर सात धारियां पायी जाती है, इस रुद्राक्ष को सप्त मातृकाओं एवं कामदेव का प्रतीक माना गया है| यह रुद्राक्ष बहुत आसानी से प्राप्त नहीं होता है, इसका नेपाली दाना ही अत्यंत प्रभावी माना गया है ये थोडा बड़ा और स्पष्ट होता है |

इस रुद्राक्ष को धारण करने से स्वर्ण चोरी और गोवध जैसे पापों से निवृति मिलती है | इस रुद्राक्ष को सप्त ऋषियों, माता महालक्ष्मी व सर्पराज बासुकी का भी आशीर्वाद प्राप्त है | सात मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से जीवन में आने वाली बाधाओं का शमन होता है और अनेक कष्टों से मुक्ति दिलाता है | सुगमता से धनागम, व्यापार वृद्धि व संपत्ति आदि की प्राप्ति के लिये इस रुद्राक्ष को धारण करना चाहिए|वात रोगों में इसे धारण करना अत्यंत लाभकारी होता है|

सात मुखी रुद्राक्ष जगत न्यायाधीश शनि ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है | जब शनि कुण्डली में नीच राशि का हो, शत्रु राशि का हो, त्रिक भावों में हो,शनि पीड़ित हो, गोचर में साढ़े साती या कंटक शनि चल रहा हो, शनि की महादशा या अन्तर्दशा चल रही हो तब सात मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए | इसको धारण करने से शनि ग्रह से प्राप्त अशुभता परिवर्तित हो कर शुभकारी हो जाता है |     

सात मुखी रुद्राक्ष धारण की सामान्य विधि :

किसी भी सोमवार, प्रदोष, पूर्णिमा अथवा शनिवार को किसी शिव मंदिर में अथवा घर में स्थापित मंदिर के सामने सात मुखी रुद्राक्ष को पंचगव्य (गाय का दूध, दही, घी, गौमूत्र व गोबर का मिश्रण) से पवित्र करें फिर रुद्राक्ष को गंगाजल से पवित्र करें, यदि पंचगव्य न मिले तो सिर्फ गंगा जल से पवित्र करें|

अपने सामने रुद्राक्ष को बजोट ( लकड़ी की छोटी चौकी ) पर किसी ताम्र अथवा रजत पात्र में स्थापित कर निम्नोक्त प्रत्येक  मंत्रो का उच्चारण करते हुए श्वेत चन्दन या भभूत लगायें–

  • ॐ वामदेवाय नमः ||
  • ॐ ज्येष्ठाय नमः ||
  • ॐ श्रेष्ठाय नमः ||
  • ॐ रुद्राय नमः ||
  • ॐ कालाय नमः ||
  • ॐ कलविकरणाय नमः ||
  • ॐ बलविकरणाय नमः ||
  • ॐ बलाय नमः ||
  • ॐ बलप्रमथनाय नमः ||
  • ॐ सर्वभूतदमनाय नमः ||
  • ॐ मनोन्मनाय नमः || 

 इसके पश्चात निम्नोक्त में से किसी भी एक मंत्र का यथाशक्ति ( कम से कम 108 बार ) जाप करें –

  • ॐ नमः शिवाय ||
  • ॐ हुं नमः ||
  • ॐ त्र्यम्बकं  यजामहे  सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् | उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ||

जाप के पश्चात रुद्राक्ष को निम्न मन्त्र को पढ़ कर धूप दिखाये –

  • ॐ अघोरेभ्योऽथ  घोरेभ्यो  घोर  घोर  तरेभ्यः | सर्वेभ्यः सर्व सर्वेभ्यो नमस्ते अस्तु रुद्र रुपेभ्यः ||

फिर निम्न मंत्रो का उच्चारण करते हुए रुद्राक्ष धारण करें –

  • ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ||

 

Share on facebook
Share on whatsapp
Share on twitter
Share on linkedin
Share on telegram
Share on print