1 Mukhi Rudraksha Amazing Benefits : एकमुखी रुद्राक्ष से लाभ व धारण विधि

1 mukhi rudraksha

एक मुखी रुद्राक्ष (1 mukhi rudraksha) को आदिदेव भगवान शिव का प्रत्यक्ष वरदान कहा गया है ,एक मुखी रुद्राक्ष को सभी रुद्राक्षों का शिरोमणि कहा गया है, यह रुद्राक्ष दो अलग अलग आकृतियों में पाया जाता है पहला गोलदाना और दुसरा काजूदाना एक मुखी रुद्राक्ष का गोल दाना अत्यन्त ही दुर्लभ माना गया है सर्वत्र काजूदाना ही सुलभता से मिलता है, 

नेपाली एक मुखी रुद्राक्ष (1 mukhi rudraksha) गोल दाना स्वतंत्र रूप से उत्त्पन्न नहीं होता है बल्कि किसी और रुद्राक्ष के साथ सयुंक्त रूप से विकसित होता है जैसे जुड़वाँ बच्चे, और जब रुद्राक्ष का फल सुख जाता है तब यह एक मुखी गोल दाना अपने आप अलग हो जाता है, यदि आपको गोल एक मुखी दाने मिल जाए तो यह जीवन का बहुत ही बड़ा सौभाग्य होगा क्योंकि इससे बड़ी कोई बात हो ही नही सकती है |

सर्वाधिक रूप से इंडोनेशिया का काजूदाना ही सर्वत्र मिलता है यह आकार में थोड़ा छोटा होता है साथ ही इसमें लकीर पूरी तरीके से स्पष्ट नहीं होता है और इसका आकार लगभग 5-9 मि.मि. का होता है, नेपाली काजूदाना थोड़ा बड़ा होता है व इसमें लकीर पूर्णतया स्पष्ट होता है और इसका आकार लगभग 10-15 मि.मि. का होता है |   

एक मुखी रुद्राक्ष (1 mukhi rudraksha) सूर्य ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है; जब कुण्डली में सूर्य नीच का हो, शत्रुक्षेत्री हो, त्रिक भावों(6,8,12) में हो या व्यक्ति सूर्य ग्रह से किसी भी प्रकार से पीड़ित हो तो उसे अवश्य ही एक मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए, यह सूर्य ग्रह की अशुभता को परिवर्तित कर शुभता प्रदान करता है |   

1 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से लाभ (1 mukhi rudraksha benefits) –

एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से ला(1 mukhi rudraksha benefits) अनगिनत रूप से धारणकर्ता को मिलता है, उनमे से ये लाभ प्रमुख हैं –  

  • यह एक मुखी रुद्राक्ष व्यक्ति को समाज में प्रसिद्धी दिलाता है,
  • एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से ब्रह्म हत्या जैसे पापों से निवृति मिलती है ,
  • यह एक मुखी रुद्राक्ष भौतिक और आध्यात्मिक दोनो क्षेत्रोँ में उन्नति प्रदान करता है,
  • यह एक मुखी रुद्राक्ष व्यक्ति के अन्दर नेतृत्वता के गुणों में भी वृद्धि करता है,
  • इस एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से व्यक्ति के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है,
  • इस एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से धारणकर्ता के एकाग्रता में वृद्धि होती है,
  • जिन्हें राजनीति में आगे बढ़ना हो उन्हें अवश्य ही इस एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करना चाहिए,
  • इस एक मुखी रुद्राक्ष (1 mukhi rudraksha) को धारण करने से व्यक्ति अपने लक्ष्य से भटकता नही है,
  • इस एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से व्यक्ति आसानी से अपने क्रोध पर नियंत्रण कर पाता है,
  • इस एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से किसी भी प्रकार के सरदर्द के रोग से मुक्ति मिल जाती है,
  • यह एक मुखी रुद्राक्ष (1 mukhi rudraksha) धारणकर्ता को सन्मार्ग की ओर चलने के लिये प्रेरित करता है,
  • जिस घर में यह एक मुखी रुद्राक्ष होता है उस घर में शान्ति और समृद्धि का माहौल होता है,
  • अवसाद ग्रस्त व्यक्ति यदि इस एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करता है तो धारणकर्ता व्यक्ति अवसाद से बाहर निकल आता है,
  • जो लोग किसी भी प्रकार के व्यसन से मुक्त होना चाहते है उन्हें यह एक मुखी रुद्राक्ष अवश्य ही धारण करना चाहिए,
  • इस एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से मानसिक रूप से बहुत अधिक सबलता मिलती है और मानसिक शान्ति का अनुभव होता है,
  • जिन विद्यार्थियों को उच्च प्रशासनिक सेवाओं में जाने की अभिलाषा है उनके लिये तो यह एक मुखी रुद्राक्ष (1 mukhi rudraksha) साक्षात् वरदान के समान है,
  • इस एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से व्यक्ति का जीवन तनाव मुक्त हो जाता है क्योंकि तनाव का जो भी कारक आपके जीवन में हो उन सभी का हल स्वत: ही आपको मिलने लगता है,
  • इस एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से धारणकर्ता के चारो ओर एक सुरक्षाचक्र निर्मित हो जाता है जिससे व्यक्ति की हर एक प्रकार से सुरक्षा होती रहती है,  
  • यदि किसी के घर में तंत्र बाधा का दुष्प्रभाव हो तो उस घर के पूजा स्थल में भगवान शिव सहित इस एक रुद्राक्ष मुखी रुद्राक्ष(1 mukhi rudraksha) का अभिषेक करने के पश्चात अभिषेक के जल को पुरे घर में छिड़कने से चाहे जैसी भी तंत्र बाधा हो उसकी निवृति होती है | 

यह रहे एक मुखी रुद्राक्ष को पहनने के प्रमुख लाभ(1 mukhi rudraksha benefits), आप एक मुखी रुद्राक्ष को धारण कर इसका लाभ ले सकते है, यदि आपको एक मुखी रुद्राक्ष चाहिए तो नीचे दिये हुए लिंक पे क्लिक करके उसे खरीद सकते है- 

एक मुखी रुद्राक्ष की उपलब्धता एवं मूल्य की जानकारी प्राप्त करें-  

एक मुखी रुद्राक्ष (1 Mukhi Rudraksha) धारण की सामान्य विधि :

किसी भी सोमवार, प्रदोष, पूर्णिमा अथवा रविवार को किसी शिव मंदिर में अथवा घर में स्थापित मंदिर के सामने एक मुखी रुद्राक्ष (1 mukhi rudraksha) को पंचगव्य (गाय का दूध, दही, घी, गौमूत्र व गोबर का मिश्रण) से पवित्र करें फिर रुद्राक्ष को गंगाजल से पवित्र करें, यदि पंचगव्य न मिले तो सिर्फ गंगा जल से पवित्र करें, अपने सामने रुद्राक्ष को बजोट ( लकड़ी की छोटी चौकी ) पर किसी ताम्र अथवा रजत पात्र में स्थापित कर निम्नोक्त प्रत्येक  मंत्रो का उच्चारण करते हुए श्वेत चन्दन या भभूत लगायें–

  • ॐ वामदेवाय नमः ||
  • ॐ ज्येष्ठाय नमः ||
  • ॐ श्रेष्ठाय नमः ||
  • ॐ रुद्राय नमः ||
  • ॐ कालाय नमः ||
  • ॐ कलविकरणाय नमः ||
  • ॐ बलविकरणाय नमः ||
  • ॐ बलाय नमः ||
  • ॐ बलप्रमथनाय नमः ||
  • ॐ सर्वभूतदमनाय नमः ||
  • ॐ मनोन्मनाय नमः || 

 इसके पश्चात निम्नोक्त में से किसी भी एक मंत्र का यथाशक्ति (कम से कम 108 बार ) जाप करें –

  • ॐ नमः शिवाय ||
  • ॐ ह्रीं नमः ||
  • ॐ त्र्यम्बकं  यजामहे  सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् | उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ||

जाप के पश्चात रुद्राक्ष को निम्न मन्त्र को पढ़ कर धूप दिखाये –

  • ॐ अघोरेभ्योऽथ  घोरेभ्यो  घोर  घोर  तरेभ्यः | सर्वेभ्यः सर्व सर्वेभ्यो नमस्ते अस्तु रुद्र रुपेभ्यः ||

फिर निम्न मंत्रो का उच्चारण करते हुए रुद्राक्ष धारण करें –

  • ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ||

 

एक मुखी रुद्राक्ष की पहचान (Identification of 1 mukhi rudraksha)

आजकल सर्वत्र ही एक मुखी रुद्राक्ष (1 mukhi rudraksha) मिलने लगा है जिसमें से अधिकांशत: प्लास्टिक के या लकड़ी द्वारा निर्मित किये जाते है परन्तु थोड़ी ही सावधानी से असली रुद्राक्ष की पहचान की जा सकती है, यदि रुद्राक्ष को अग्नी के समीप ले जाने पर यदि रुद्राक्ष मुलायम पड़ने लगे या पिघलने लगे तो इससे पता चलता है की वह रुद्राक्ष प्लास्टिक से निर्मित है, 

लकड़ी से निर्मित रुद्राक्ष में जो उभार या धारियां होती है वह गोलाई लिए हुये और चिकनी नहीं होती है उसे ध्यान से देखने पर उसकी बनावट का नकली होने का पता चलता है, कुछ दो मुखी दानों के एक मुख को किसी भी प्रकार से बन्द करके कई व्यापारी लोग इसे एक मुखी बता कर देते है,

रुद्राक्ष को हल्का सा पानी में उबालने से यदि वह रंग छोड़ने लगे तो वह रुद्राक्ष नकली होगा क्योंकि असली रुद्राक्ष कभी रंग नहीं छोड़ता है, कुछ लोग कहते है की दो तांबे के सिक्के के मध्य रुद्राक्ष घुमने लगता है परन्तु इस विधि की विश्वसनीयता में हमेशा संशय बना रहता है क्योंकि रुद्राक्ष को किसी भी प्रकार से चालाकी से दो सिक्कों के मध्य घुमाया जा सकता है, 

रुद्राक्ष के पहचान की दूसरी विधि यह है की यदि रुद्राक्ष को पानी में डालने से रुद्राक्ष पानी में डूब जाये तो वह रुद्राक्ष असली माना जाता है परन्तु यह विश्वसनीय विधि नहीं है क्योंकि रुद्राक्ष का दाना बिल्कुल सुख जाये या उनके अन्दर हवा भरी हो तो वह रुद्राक्ष असली होने के बावजूद भी पानी में नही डूबेगा, 

रुद्राक्ष के पहचान की सर्वाधिक प्रमाणिक व विश्वसनीय विधि यह है की जिस भी रुद्राक्ष के बारे में जानना हो उसका एक्स-रे करने से उसके अन्दर बीजों की संख्या के अनुसार पता कर सकते है, एक्स-रे से प्राप्त चित्र में यदि रुद्राक्ष के बीज दिखते है तो वह रुद्राक्ष असली होगा और साथ ही बीजों की संख्या के आधार पर उनके मुखों की संख्या का निर्णय कर सकते है, रुद्राक्ष का एक्स-रे करने से दाने को बिना कोई क्षति पहुचायें दानें के बारे में प्रमाणिक जानकारी प्राप्त कर सकते है |         

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