दो मुखी रुद्राक्ष की महिमा व धारण विधि :

दो मुखी रुद्राक्ष की महिमा व धारण विधि

दो मुखी रुद्राक्ष में प्राकृतिक रूप से इसकी सतह पर दो धारियां पायी जाती है, इस रुद्राक्ष को अर्धनारीश्वर का प्रतीक माना गया है, यह शिव एवं शक्ति का युग्म है| दो मुखी रुद्राक्ष इंडोनेशिया व नेपाल में पाया जाता है जिनमे नेपाली दाना में दोनों धारियां स्पष्ट होती है और इंडोनेशिया दाना पूर्णतया स्पष्ट नहीं होता है|

दो मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से गोहत्या के पाप से निवृति मिलती है| इसे धारण करने से दाम्पत्य जीवन में मधुरता आती है, पति पत्नी में सामंजस्यपूर्ण व्यवहार रहता है, जिनके विवाह होने में अकारण विलम्ब हो रहा हो उन्हें यह रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहीये| यह रुद्राक्ष धारणकर्ता के मानसिक स्थितियों को बहुत प्रभावित करता है एवं विचारों को परिष्कृत व शुद्ध करता है |

दो मुखी रुद्राक्ष चन्द्र ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है | जब चन्द्रमा कुण्डली में नीच राशि का हो, शत्रु राशि का हो, त्रिक भावों(6,8,12)में हो, पक्ष बलि न हो ( मुख्यतः सूर्य से 72 अंश के अन्दर हो ) अथवा राहू या शनि से पीड़ित हो तो दो मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए| यह चन्द्र ग्रह की अशुभता को परिवर्तित कर शुभता प्रदान करता है|              

दो मुखी रुद्राक्ष धारण की सामान्य विधि :

किसी भी सोमवार, प्रदोष, पूर्णिमा को किसी शिव मंदिर में अथवा घर में स्थापित मंदिर के सामने दो मुखी रुद्राक्ष को पंचगव्य (गाय का दूध, दही, घी, गौमूत्र व गोबर का मिश्रण) से पवित्र करें फिर रुद्राक्ष को गंगाजल से पवित्र करें, यदि पंचगव्य न मिले तो सिर्फ गंगा जल से पवित्र करें|

अपने सामने रुद्राक्ष को बजोट ( लकड़ी की छोटी चौकी ) पर किसी ताम्र अथवा रजत पात्र में स्थापित कर निम्नोक्त प्रत्येक  मंत्रो का उच्चारण करते हुए श्वेत चन्दन या भभूत लगायें–

  • ॐ वामदेवाय नमः ||
  • ॐ ज्येष्ठाय नमः ||
  • ॐ श्रेष्ठाय नमः ||
  • ॐ रुद्राय नमः ||
  • ॐ कालाय नमः ||
  • ॐ कलविकरणाय नमः ||
  • ॐ बलविकरणाय नमः ||
  • ॐ बलाय नमः ||
  • ॐ बलप्रमथनाय नमः ||
  • ॐ सर्वभूतदमनाय नमः ||
  • ॐ मनोन्मनाय नमः || 

 इसके पश्चात निम्नोक्त में से किसी भी एक मंत्र का यथाशक्ति (कम से कम 108) जाप करें –

  • ॐ नमः शिवाय ||
  • ॐ नमः ||
  • ॐ त्र्यम्बकं  यजामहे  सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् | उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ||

जाप के पश्चात रुद्राक्ष को निम्न मन्त्र को पढ़ कर धूप दिखाये –

  • ॐ अघोरेभ्योऽथ  घोरेभ्यो  घोर  घोर  तरेभ्यः | सर्वेभ्यः सर्व सर्वेभ्यो नमस्ते अस्तु रुद्र रुपेभ्यः ||

फिर निम्न मंत्रो का उच्चारण करते हुए रुद्राक्ष धारण करें –

  • ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ||

 

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